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भजन - आज मेरी बिनती सुनके, गुणवंत सुधी लिजिये

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भजन 

(तर्ज : पिया मिलन के काज. .. )

आज मेरी बिनती सुनके, गुणवंत सुधी लिजिये।
बारबार कर जोरत स्वामी ! दान यही दिजिये।।टेक।।

फेर-फेरकर जन्म दिलावत, सुजनों में भिजिये।
मैल भरा सब घटके अंदर, सब निर्मल किजिये।।१।।

बेद श्रुति को बचन सुनातो, नेति कहे रिझिये।
अगम-निगम को पार न लागे, पाप सभी छिजिये।।२।।

कहता तुकड्यादास सुनों प्रभु, प्राण कहूँ तजिये।
पर, भवपाश का नाश करो अब, चरण -स्मरण दिजिये।।३।।




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